व्हाइट टॉपिंग तकनीक से सड़कों में नई क्रांति या भ्रष्टाचार की नई कहानी?

 

 

आगर मालवा में करोड़ों की सड़क निर्माण में गुणवत्ता पर सवाल, श्रद्धालु और राहगीर परेशान

 

आगर मालवा। प्रदेश सरकार ने सड़कों की मजबूती और टिकाऊपन बढ़ाने के लिए पहली बार व्हाइट टॉपिंग तकनीक को अपनाया है। इस तकनीक को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में 21 जिलों में लागू किया गया है, जिनमें कुल 41 सड़कों पर 109 किलोमीटर लंबा निर्माण कार्य किया जा रहा है। इसका उद्देश्य डामर सड़कों को सीमेंट-कांक्रीट परत से और मजबूत बनाना है, ताकि रखरखाव का खर्च घटे और यातायात व्यवस्था सुगम हो।

 

इसी क्रम में आगर-मालवा जिला मुख्यालय पर 2.55 किमी लंबी सड़क — छावनी गांधी उपवन से लेकर बाबा बैजनाथ महादेव मंदिर तक — बनाई जा रही है। लगभग तीन करोड़ रुपये की लागत वाले इस कार्य का ठेका मेसर्स देवकाली इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया था। कार्यादेश जारी होने के बाद 8 माह में काम पूरा होना था, पर समय सीमा समाप्त हो चुकी है और निर्माण कार्य अब तक अधूरा है।

 

निर्माण के दौरान लापरवाही और मानकों की अनदेखी

निर्माण के दौरान न तो गुणवत्ता मानकों का पालन किया जा रहा है, न ही सुरक्षा उपाय किए गए हैं। राहगीर, स्कूल के बच्चे और मंदिर आने वाले सैकड़ों श्रद्धालु रोजाना असुविधा झेल रहे हैं। निर्माण स्थल पर लेवल, केम्बर और सुपर एलिवेशन का ध्यान नहीं रखा गया है। मशीनों की जगह पुराने उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है। साइट पर प्रयोगशाला और सीसीटीवी कैमरे भी स्थापित नहीं किए गए हैं।

 

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि निर्माण एजेंसी और विभाग की मिलीभगत के चलते कार्य न तो समय पर हो रहा है, न ही निर्धारित मापदंडों के अनुसार। हादसों की आशंका के बावजूद आवागमन के वैकल्पिक मार्ग नहीं बनाए गए, जिससे दोपहिया वाहन चालक आए दिन घायल हो रहे हैं।

 

डामर कार्य की गुणवत्ता पर भी उठे सवाल

शुरुआत में किया गया डामर कार्य दो माह में ही उखड़ गया। इसके बावजूद उसी क्षतिग्रस्त सतह पर सीमेंट-कांक्रीट की परत डाल दी गई। विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीकी दृष्टि से यह गलत प्रक्रिया है और इससे सड़क की मजबूती प्रभावित होगी। जनता में भी सवाल उठ रहे हैं कि जब पुरानी सड़क खराब थी तो दोबारा डामर का खर्च क्यों किया गया।

 

23 अक्टूबर को हुआ औचक निरीक्षण

लगातार शिकायतों के बाद 23 अक्टूबर को लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों द्वारा निर्माण स्थल का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान सैंपल लिए गए और गुणवत्ता जांच की गई।

 

लो.नि.वि. अनुविभागीय अधिकारी नवीन शर्मा ने कहा —

“हमारे द्वारा जो कार्य करवाया जा रहा है, उसमें गुणवत्ता का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। रहा सवाल डामर कार्य का, तो उस समय मैं यहां पर पदस्थ नहीं था, इसलिए कुछ कहना संभव नहीं है। सड़क के साइड के शोल्डर भराई का कार्य मापदंड अनुसार टेस्टिंग करवाकर ही किया जाएगा और जो शोल्डर भरे गए हैं, उनकी खुदाई कराकर फिर से मापदंड अनुसार ही भरवाए जाएंगे। दिनांक 23 अक्टूबर को इस निर्माणाधीन सड़क का औचक निरीक्षण किया जा चुका है और उसकी टेस्ट रिपोर्ट भी आ चुकी है।”

 

कार्यपालन यंत्री कुलदीप चंद्रवंशी ने कहा —

 

“कार्य समयावधि में पूर्ण नहीं होने से हमारे द्वारा पेमेंट काटकर ही भुगतान किया जाएगा।”

 

जनप्रतिनिधियों और नागरिकों की मांग

 

पूर्व पार्षद देवेन्द्र वर्मा ने कहा —

“बाबा बैजनाथ महादेव की जो सड़क बन रही है, उसी डामर सड़क पर जो डामर किया गया था वह बिल्कुल ही घटिया था, जो दो माह में ही उखड़ गया। और उसी उखड़ी हुई डामर सड़क पर सीमेंट-कांक्रीट कर दिया गया, जो यह साबित करता है कि ठेकेदार और विभाग की मिलीभगत का परिणाम है। इस निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय जांच होना चाहिए और ठेकेदार के भुगतान पर रोक लगाई जानी चाहिए।”

 

जनता की अपेक्षा — विकास के साथ जवाबदेही जरूरी

जनता का कहना है कि यदि व्हाइट टॉपिंग तकनीक वाकई भविष्य की सड़कों का समाधान है, तो इसका सही क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। अन्यथा यह करोड़ों का प्रोजेक्ट भी भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ जाएगा। श्रद्धालुओं और राहगीरों की सुविधा व सुरक्षा लोक निर्माण विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

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