फार्मेसी काउंसिल के अव्यावहारिक निर्णयों के विरोध में आगर जिला केमिस्ट्स एसोसिएशन ने जताई कड़ी नाराजगी |

 

आगर मालवा। मध्यप्रदेश फार्मेसी काउंसिल द्वारा 10 सितंबर 2025 को लिए गए नए नीतिगत निर्णयों को लेकर आगर जिला केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन ने कड़ा विरोध जताया है। संगठन का कहना है कि ये निर्णय पूरी तरह अव्यावहारिक, एकतरफा और केमिस्ट–फार्मासिस्ट समुदाय के हितों के विपरीत हैं।

जिला अध्यक्ष अनिल शर्मा, सचिव योगेश पांडे, सदस्य राजेश मेठी, सुरेंद्र राठौर सहित जिला के अन्य पदाधिकारियों ने कहा कि काउंसिल ने बिना किसी पूर्व चर्चा और बिना हितधारकों की राय लिए ऐसे प्रावधान लागू कर दिए हैं, जिनका सीधा असर प्रदेश के लगभग 80, हजार जिसमें आगर जिले के लगभग 3 सो फार्मासिस्टों और हजारों केमिस्टों पर पड़ेगा। उन्होंने इन निर्णयों को तुरंत वापस लेने की मांग करते हुए नाराजगी जाहिर की।
संगठन ने बताया कि काउंसिल की बैठक में भविष्य की कार्ययोजना पेश की जानी थी, लेकिन उसके स्थान पर अचानक कई कठोर प्रावधान लागू कर दिए गए। जिला पदाधिकारियों के अनुसार देश की किसी भी राज्य फार्मेसी काउंसिल में ऐसे नियम लागू नहीं हैं।

मुख्य आपत्तियाँ– समग्र पोर्टल से अनिवार्य इंटीग्रेशन , तकनीकी रूप से कठिन व ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग असंभव। दस्तावेजों का डिजी–लॉकर अपलोड अनिवार्य — प्रक्रिया बोझिल व समय–साध्य।
नवीनीकरण शुल्क 500 से बढ़ाकर 2500 — प्रदेश में सर्वाधिक, पूरी तरह अनुचित।

31 मार्च को नवीनीकरण न होने पर पंजीकरण निरस्त — अत्यधिक कठोर व्यवस्था।

विलंब शुल्क 2000 प्रतिवर्ष (अधिकतम 8000) — असंगत एवं अत्यधिक दंडात्मक।
65 वर्ष से अधिक आयु वालों के लिए लाइफ सर्टिफिकेट/मेडिकल बोर्ड फिटनेस अनिवार्य — वरिष्ठ फार्मासिस्टों पर अनावश्यक बोझ।
हजारों आवेदन लंबित, नए भी प्रभावित

संगठन ने बताया कि प्रदेशभर से हजारों पंजीकरण, त्रुटि–सुधार और सत्यापन से जुड़े आवेदन लंबे समय से काउंसिल में लंबित हैं। वहीं दिसंबर 2025 में नवीनीकरण हेतु तैयार अनुभव आधारित आवेदन भी नई प्रक्रिया के कारण प्रभावित हो रहे हैं।

आगर जिला संगठन की मांग-
जिला अध्यक्ष अनिल शर्मा व सचिव योगेश पांडे ने कहा कि जब सरकार प्रक्रियाओं को सरल बनाने की बात कर रही है, तब फार्मेसी काउंसिल द्वारा प्रक्रियाओं को जटिल करना उचित नहीं है।
संगठन ने मांग की कि—

नए प्रावधानों पर तत्काल रोक लगाई जाए,

विवादित निर्णयों पर पुनर्विचार किया जाए,

ताकि प्रदेश के फार्मासिस्टों पर अनावश्यक बोझ न पड़े।

जिला संगठन के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि निर्णय वापस नहीं लिए गए तो केमिस्ट–फार्मासिस्ट समुदाय आंदोलन के लिए विवश होगा।

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