पेयजल गुणवत्ता बनाए रखने हेतु कलेक्टर सख्त , निकायों को निर्देश
आगर मालवा । कलेक्टर प्रीति यादव द्वारा नगरीय निकाय क्षेत्र के अंतर्गत जल स्रोतों, जल संग्रहण एवं वितरण व्यवस्था को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण बनाए रखने के उद्देश्य से आवश्यक सावधानियां बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
कलेक्टर के निर्देशानुसार परियोजना अधिकारी, जिला शहरी विकास अभिकरण मिलिंद ढोके ने सभी नगरीय निकायों के सीएमओ को पत्र जारी कर निर्देशित किया है कि नागरिकों को शुद्ध एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने हेतु निम्न बिंदुओं का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए।
जारी पत्र में निर्देश दिए है कि जल स्रोतों की नियमित साफ-सफाई कराई जाए। जल शुद्धिकरण संयंत्र (WTP) के फिल्टर बेड का नियमित संधारण किया जाए तथा जल शुद्धिकरण के लिए WTP पर आवश्यक मात्रा में एलम/क्लोरीन की उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए निर्धारित मात्रा में उपयोग किया जाए।
निकाय क्षेत्र में स्थित सभी उच्च स्तरीय जल टंकियों की वर्ष में कम से कम दो बार साफ-सफाई कराई जाए तथा टंकी की सफाई की तिथि टंकी पर स्पष्ट रूप से अंकित की जाए। हैंडपंप एवं नलकूपों में ब्लिचिंग पाउडर या लिक्विड सोडियम हाइपोक्लोराइट के माध्यम से पानी को जीवाणुरहित किया जाए।
पाइपलाइन, विशेषकर खुली नालियों अथवा सीवर के पास से गुजरने वाली पाइपलाइनों का नियमित निरीक्षण कर आवश्यक रख-रखाव किया जाए। पानी के रंग में परिवर्तन या दुर्गंध की शिकायत मिलने पर तत्काल जल प्रदाय रोका जाए तथा वैकल्पिक स्रोतों जैसे टैंकर, नलकूप या हैंडपंप से जल आपूर्ति की जाए। शिकायतों का 24 घंटे के भीतर निराकरण सुनिश्चित करते हुए प्रभावी जल शुद्धिकरण तकनीक का उपयोग कर शुद्ध पेयजल वितरण किया जाए।
पेयजल वितरण नलिकाओं में पाए जाने वाले सभी लीकेज को 24 घंटे के भीतर दुरुस्त किया जाना सुनिश्चित किया जाए। कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की उपस्थिति वाला जल पीने योग्य नहीं होता है, अतः पेयजल में कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की नियमित जांच कराई जाए। निकाय क्षेत्र के जल स्रोतों, ट्रीटमेंट प्लांट, उच्च स्तरीय टंकियों एवं प्रत्येक वाल्व से वितरित जल की अंतिम नल कनेक्शन तक से सैंपल लेकर जांच कराई जाए तथा जांच के अभिलेख संधारित किए जाएं।
अपील
जिला प्रशासन की नागरिकों से अपील है कि सीवरेज, नाली या किसी भी स्थान पर पाइप लाइन लीकेज, फूटी दिखाई दे तो उसकी तुरंत सूचना संबधित नगरीय निकाय सीएमओ को दे , जिससे कि समय रहते लीकेज दुरुस्त किया जा सके।