दवा दुकानों से हटेंगे डिस्काउंट बोर्ड, फार्मेसी काउंसिल ने लिया सख्त फैसला |
फार्मेसी अधिनियम और प्रतिस्पर्धा कानून के उल्लंघन पर हो सकती है सख्त कार्रवाई
आगर-मालवा। उपभोक्ताओं को लुभाने के लिए दवा दुकानों पर लगाए जाने वाले,छूट,और,डिस्काउंट, के बोर्ड अब बीते दिनों की बात होंगे। मध्यप्रदेश फार्मेसी काउंसिल की हाल ही में संपन्न हुई बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि फार्मेसी अधिनियम के तहत ऐसे विज्ञापन पूर्णत, प्रतिबंधित हैं और इनका प्रदर्शन अवैध माना जाएगा।
गौतमचंद धींग बोले— डिस्काउंट का विज्ञापन फार्मेसी रेगुलेशन एक्ट का उल्लंघन
एमपी केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष गौतमचंद धींग ने जानकारी देते हुए। बताया कि फार्मेसी अधिनियम 1948 के अंतर्गत बनाए गए फार्मेसी रेगुलेशन एक्ट की धारा 7 एवं 8 के अनुसार, पंजीकृत फार्मासिस्ट को किसी भी प्रकार की छूट (डिस्काउंट) का प्रचार करना कानूनन गलत है। सोशल मीडिया, होर्डिंग, पोस्टर या किसी अन्य माध्यम से डिस्काउंट के विज्ञापन करने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
हो सकता है लाइसेंस निलंबन या निरस्तीकरण
फार्मेसी काउंसिल ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई पंजीकृत फार्मासिस्ट इस नियम का उल्लंघन करता है, तो उसका रजिस्ट्रेशन निलंबित अथवा निरस्त किया जा सकता है। साथ ही उस मेडिकल स्टोर के संचालक को भी दंड भुगतना पड़ सकता है।
बड़े व्यापारी बना रहे अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा का माहौल
काउंसिल ने यह भी उल्लेख किया कि कुछ बड़े व्यापारी अपनी आर्थिक शक्ति का उपयोग करते हुए भारी डिस्काउंट के विज्ञापन जारी करते हैं, जिससे छोटे दुकानदारों के लिए बाजार में प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो जाता है। यह अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा न केवल व्यापारियों के लिए हानिकारक है, बल्कि उपभोक्ताओं के हितों और बाजार की निष्पक्षता के भी विरुद्ध है।
प्रतिस्पर्धा कानून 2022 के तहत भी कार्रवाई संभव
प्रतिस्पर्धा कानून 2022 की धारा 4 के अनुसार, इस प्रकार की अनुचित व्यापारिक गतिविधियां देश और प्रदेश के आर्थिक विकास में बाधा बन सकती हैं। यह कार्य जनहित के भी विरुद्ध माना जाएगा और प्रतिस्पर्धा आयोग द्वारा ऐसे दुकानदारों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
सभी मेडिकल स्टोर संचालकों से अपील – केमिस्ट संगठन के जिला अध्यक्ष अनिल शर्मा, , सचिव योगेश पाण्डे, राजेश मेठी
सुरेन्द्र कुमार राठौर ने सभी मेडिकल स्टोर संचालकों, फार्मासिस्टों और दवा विक्रेताओं से अपील की है कि वे अपने प्रतिष्ठानों से डिस्काउंट संबंधी सभी विज्ञापन, बोर्ड एवं प्रचार सामग्री को तत्काल प्रभाव से हटा लें। यह कदम न केवल कानूनी रूप से आवश्यक है, बल्कि एक स्वस्थ, निष्पक्ष और जनहितकारी चिकित्सा व्यवसायिक वातावरण के लिए भी जरूरी है।जानकारी संघठन के ज़िला मिडिया प्रभारी दारा सिंह आर्य ने दी।
