मुख्य नहर घास व झाड़ियों में गुम, किसान पानी को तरसे |
1985 में बना था टिल्लर जलाशय, अब खेत तैयार पर पानी का इंतजार
कानड़। अंचल के सबसे बड़े टिल्लर जलाशय से हर साल कानड़ सहित आसपास के गांवों के किसान अपनी रबी फसलों के लिए सिंचाई की उम्मीद लगाते हैं। लेकिन इस बार किसानों के खेत तो तैयार हैं, पर नहरों में पानी की जगह घास और झाड़ियाँ उग आई हैं। नहरों की सफाई और मरम्मत के अभाव में मुख्य नहर लगभग गुम सी हो गई है, जिससे अंतिम छोर के किसानों तक पानी समय पर नहीं पहुंच पाता।
किसानों ने बताया कि टिल्लर जलाशय वर्ष 1985 में तैयार हुआ था, तब यह नहर पक्की बनी थी और इसके भीतर फर्सी भी लगाई गई थी। लेकिन वर्षों से रखरखाव नहीं होने के कारण नहर कई जगहों पर टूटी-फूटी हालत में है। पानी तेज बहने पर कई हिस्सों से फूट जाती है, जिससे कीमती पानी व्यर्थ बह जाता है।
किसानों का कहना है कि अब गेहूं, चना और दलहनी फसलों के लिए पानी की आवश्यकता होगी ।यदि समय पर नहरों से सिंचाई का पानी मिला तो फसलें बेहतर होंगी, अन्यथा उत्पादन पर असर पड़ेगा। किसानों ने यह भी सुझाव दिया कि नहर में कुलपे (पानी नियंत्रक संरचना) लगाई जाएं और सफाई कार्य सुव्यवस्थित तरीके से किसानों की सलाह लेकर किया जाए।
हर साल दोहराई जाती है लापरवाही_
किसानों का आरोप है कि जल संसाधन विभाग की लापरवाही के चलते नहरों की सफाई औपचारिकता बनकर रह गई है। कई जगह चूहों के बिलों के कारण नहर फूट जाती है, जिससे खेतों तक पानी पहुंचने से पहले ही बह जाता है। वहीं, कुछ स्थानों पर नहर की दीवारें टूटने की कगार पर हैं।
जल संसाधन विभाग की सफाई
जल संसाधन विभाग के अनुविभागीय अधिकारी परलेश बामनिया ने बताया कि ,दीपावली के बाद कलेक्टर एवं वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक में यह तय किया जाएगा कि नहरों से पानी कब छोड़ा जाएगा। साथ ही नहरों की सफाई और मरम्मत के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। विभाग द्वारा खराब हिस्सों को सुधारने का कार्य जल्द शुरू किया जाएगा।
किसानों की मांग __
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि जलाशय से लेकर पूरी मुख्य नहर तक की व्यापक मरम्मत व सफाई अभियान चलाया जाए, ताकि पानी का अपव्यय न हो और अंतिम छोर तक हर खेत को पानी मिल सके।
