अवैध ई-फार्मेसियाँ बढ़ा रहीं एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस, राष्ट्रीय संगठन ने प्रधानमंत्री से की सख्त कार्रवाई की मांग

 

आगर मालवा। देश में अवैध रूप से संचालित ई-फार्मेसियों द्वारा बिना वैध चिकित्सकीय पर्चे के एंटीबायोटिक्स की ऑनलाइन बिक्री एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) को तेजी से बढ़ा रही है, जो अब एक गंभीर राष्ट्रीय जनस्वास्थ्य संकट बन चुकी है। इस मुद्दे को लेकर ऑल इंडिया ऑर्गनाइज़ेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से तत्काल एवं कठोर हस्तक्षेप की मांग की है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे. एस. शिंदे एवं महासचिव राजीव सिंघल ने संयुक्त रूप से जारी बयान में कहा कि प्रधानमंत्री के हालिया “मन की बात” कार्यक्रम में ICMR रिपोर्ट के आधार पर व्यक्त की गई चिंताएँ इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि देश में एंटीबायोटिक्स का अंधाधुंध और गैर-जिम्मेदाराना उपयोग तेजी से खतरनाक होता जा रहा है। उन्होंने बताया कि निमोनिया और मूत्र मार्ग संक्रमण (UTI) जैसी सामान्य बीमारियों में प्रयुक्त एंटीबायोटिक्स भी स्व-चिकित्सा के कारण प्रभावहीन होती जा रही हैं।

संगठन जो देशभर के 12.40 लाख से अधिक लाइसेंसधारी केमिस्ट एवं ड्रगिस्ट्स का प्रतिनिधित्व करता है, ने आरोप लगाया कि कई ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्म ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट का खुला उल्लंघन करते हुए बिना वैध चिकित्सकीय पर्चे के एंटीबायोटिक्स एवं अन्य प्रिस्क्रिप्शन दवाओं की आपूर्ति कर रहे हैं। संगठन के अनुसार, कुछ प्लेटफॉर्म टेली-मेडिसिन दिशानिर्देशों का दुरुपयोग कर सतही ऑनलाइन परामर्श के माध्यम से औपचारिक अथवा फर्जी पर्चे जारी कर दवाओं की बिक्री कर रहे हैं।

वही आगर जिला केमिस्ट संगठन के अध्यक्ष अनिल शर्मा, सचिव योगेश पांडे, राजेश मेठी ने कहा कि इन अवैध गतिविधियों को विभिन्न नियामक एजेंसियों द्वारा कई बार उजागर किया जा चुका है और मीडिया में भी इस पर रिपोर्ट प्रकाशित होती रही हैं। इसके बावजूद प्रवर्तन एजेंसियों की कार्रवाई कमजोर बनी हुई है, जबकि दिल्ली उच्च न्यायालय पहले ही ई-फार्मेसियों की गतिविधियों को अवैध ठहरा चुका है।

 

राष्ट्रीय ओर प्रदेश संगठन के पदाधिकारीयो ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो इससे उपचार विफलताओं में वृद्धि होगी, स्वास्थ्य प्रणाली पर अत्यधिक दबाव पड़ेगा और आम नागरिकों का जीवन खतरे में पड़ जाएगा।

 

केमिस्ट संगठन की प्रमुख मांगें

अवैध रूप से संचालित सभी ई-फार्मेसियों को तत्काल बंद किया जाए।

AIOCD के सहयोग से बिना वैध चिकित्सकीय पर्चे के ऑनलाइन प्रिस्क्रिप्शन दवाओं की बिक्री पर प्रभावी रोक लगाई जाए।

राष्ट्रीय हित के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे. एस. शिंदे और महासचिव राजीव सिंघल ने कहा कि संगठन सरकार की “स्वस्थ भारत – सुरक्षित भारत” की परिकल्पना के साथ मजबूती से खड़ा है और एंटीबायोटिक्स के तर्कसंगत एवं जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देने के लिए निरंतर जन-जागरूकता अभियान चलाता रहेगा। उक्त जानकारी केमिस्ट एसोसिएशन के जिला मीडिया प्रभारी दारा सिंह आर्य के द्वारा दी गई।

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