रिपोर्ट, गोरधन कुंभकार
कानड़। वर्ष 2026 का आगमन उल्लास, नई उम्मीदों और सकारात्मक संकल्पों के साथ हो रहा है। नए वर्ष के स्वागत को लेकर लोग न केवल उत्सव मनाने, बल्कि आत्मिक शांति, देव दर्शन और प्रकृति के सान्निध्य में समय बिताने की इच्छा भी जता रहे हैं। ऐसे में कानड़ नगर एवं इसके आसपास स्थित धार्मिक व पर्यटन स्थल श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनकर उभरे हैं।
कानड़ नगर से महज तीन किलोमीटर दूर शिवगढ़ रोड किनारे स्थित देवडूंगरी धाम नगर व ग्रामीण क्षेत्र की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां 150 फीट ऊंची पहाड़ी पर विराजित भगवान श्री देवनारायण के दर्शन हेतु श्रद्धालुओं को लगभग 60 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। हरियाली से आच्छादित शांत वातावरण में स्थित यह धाम मन को विशेष शांति प्रदान करता है। दर्शन के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालु अक्सर यही कहते हैं कि यहां से लौटने का मन नहीं करता।
नगर के समीप शिव पहाड़ी पर स्थित प्राचीन बाबा भूतेश्वर महादेव का मंदिर भी आस्था का प्रमुख केंद्र है। यह मंदिर अपने आप में चमत्कारी स्वरूप लिए हुए है। वहीं देवसागर तालाब पर स्थित बल्ड़ा वाले देव का मंदिर और आसपास फैली मनोहारी हरियाली श्रद्धालुओं को विशेष रूप से आकर्षित करती है।
कानड़ नगर के चारों ओर अंगरक्षक की तरह विराजित संकट मोचन हनुमान मंदिर—खेड़ापति हनुमान, पंचमुखी हनुमान, संकट मोचन हनुमान एवं हनुमान बावड़ी वाले दादा—नगर की धार्मिक पहचान को सुदृढ़ करते हैं। इसके साथ ही मां आदिशक्ति का विशेष आशीर्वाद भी नगर पर बना हुआ है। माताजी रोड स्थित अति प्राचीन मां बिजासन माता मंदिर तथा नगर में विराजित 51 शक्तिपीठों में शामिल मां हिंगलाज देवी श्रद्धालुओं की गहरी आस्था के केंद्र हैं।
शहरी विकास योजनाओं के अंतर्गत धार्मिक स्थलों तक पहुंच को भी सुगम बनाया गया है। पूर्व में कच्चे रास्तों से पहुंचने वाले हनुमान बावड़ी एवं देवसागर तालाब स्थित देव महाराज के मंदिर तक अब पक्के मार्ग बन चुके हैं, जिससे श्रद्धालुओं को दर्शन में किसी प्रकार की असुविधा नहीं हो रही है।
देवडूंगरी धाम पर प्रतिवर्ष समिति द्वारा श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जाता है, जिसमें जिले सहित आसपास के क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु भाग लेते हैं। मंदिर परिसर में भजन, रसोई एवं सहभोज की व्यवस्थाएं भी की जाती हैं। प्रकृति के बीच स्थित यह स्थल आध्यात्मिक साधना और मानसिक शांति के लिए अत्यंत उपयुक्त माना जाता है।
इसी क्रम में कानड़ से समीप पचेटी ग्राम में स्थित बाड़ी माता का मंदिर भी आस्था का बड़ा केंद्र है। देवी की मान्यता दूर-दराज तक फैली हुई है और नव वर्ष के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
वर्ष 2025 की विदाई और नव वर्ष 2026 की शुरुआत यदि देव दर्शन, पूजा-अर्चना और प्रकृति के सान्निध्य में की जाए, तो यह न केवल मन को शांति प्रदान करती है, बल्कि नए संकल्पों को साकार करने की प्रेरणा भी देती है। ऐसे में कानड़ और आसपास के ये धार्मिक एवं प्राकृतिक स्थल नए वर्ष के स्वागत के
लिए श्रेष्ठ विकल्प साबित हो रहे हैं।
