श्रीकृष्ण-रुक्मणी विवाह कथा का हुआ रोचक आयोजन !

आगर-मालवा। माहेश्वरी समाज द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के दौरान शुक्रवार को भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मणी का विवाह बड़े ही हर्षोल्लास और भक्तिभाव के साथ संपन्न हुआ। कथावाचक ने विवाह प्रसंग का जीवंत और रोचक वर्णन कर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कथा में कंस वध प्रसंग सुनाते हुए बताया गया कि पापी चाहे कितना भी बलशाली क्यों न हो, उसे एक दिन अपने पापों का दंड अवश्य भुगतना पड़ता है। वहीं जरासंध प्रसंग के माध्यम से समझाया गया कि जिस प्रकार उसने 17 बार मथुरा पर आक्रमण किया लेकिन हर बार असफल रहा और 18वीं बार कालयवन के साथ मिलकर विजय प्राप्त की, उसी प्रकार मनुष्य का शरीर भी मथुरा पुरी है। जरासंध की तरह बुढ़ापा लगातार आक्रमण करता है और जब उसकी अनदेखी की जाती है तो कालयवन यानी मृत्यु आकर शरीर छीन लेती है।

कथावाचक ने जीवन से जुड़ी गूढ़ उपमाओं को सरल भाषा में प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। कथा में भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मणी के विवाह का प्रसंग श्रद्धालुओं के लिए मुख्य आकर्षण रहा।

इस अवसर पर आज के जजमान के रूप में कृष्णदास, ओमप्रकाश, जयप्रकाश महेश्वरी, बंशीधर, आशीष महेश्वरी, सुशील कुमार, सुनील कुमार, लड़ा गोविंद जाजू एवं श्री प्रसाद धुत सहित समाजजन उपस्थित रहे।

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