कथिका में सजा कविता का मौसम, ‘नन्हे’ अभिनव चतुर्वेदी ने शब्दों से जोड़ा दिल

 

नई दिल्ली। 17 जनवरी शनिवार की शाम दिल्ली में हिंदी कविता का एक खास रंग देखने को मिला, जब लोकप्रिय धारावाहिक ‘हम लोग’ में ‘नन्हे’ के किरदार से घर-घर पहचान बनाने वाले अभिनेता, एंकर और सांस्कृतिक संवाहक अभिनव चतुर्वेदी ने अपनी विशेष काव्य प्रस्तुति ‘मौसम यही है’ के माध्यम से श्रोताओं को भावनाओं की गहराइयों से रू-बरू कराया।

‘मौसम यही है’ सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि शब्दों और संवेदनाओं का ऐसा अनुभव था, जिसने यह साबित किया कि डिजिटल शोर के दौर में भी हिंदी कविता समाज की चेतना और आत्मा को छूने की पूरी क्षमता रखती है। कविताओं की सशक्त प्रस्तुति ने श्रोताओं को केवल सुनने तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें समय, समाज और मनुष्य के भावनात्मक पक्ष से जोड़ दिया।

 

कथिका में हुआ आयोजन, शब्दों और सुरों का संगम

यह कार्यक्रम पुरानी दिल्ली के प्रसिद्ध सांस्कृतिक केंद्र ‘कथिका’ में आयोजित किया गया। आयोजन को टीडीआई के रविन्द्र तनेजा और धारावाहिक ‘साई’ में साई बाबा की भूमिका निभा चुके, साई पर कई पुस्तकें लिख चुके अभिनेता-लेखक औशिम खेत्रपाल के सहयोग से साकार रूप मिला।

कविता पाठ के साथ सजीव संगीत की प्रस्तुति ने माहौल को और भी प्रभावशाली बना दिया। शब्दों, सुरों और संगीत के समन्वय ने दर्शकों को एक अलग ही अनुभव दिया, जिसे उन्होंने लंबे समय तक याद रखने की बात कही।

संस्कृति से जुड़ने का सशक्त माध्यम है कविता

कार्यक्रम में बीजेपी कल्चरल सेल की हेड एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता रोचिका अग्रवाल सहित साहित्य, पत्रकारिता, कला और कॉर्पोरेट जगत की कई जानी-मानी हस्तियाँ मौजूद रहीं।

इस अवसर पर टीडीआई के हेड रविन्द्र तनेजा ने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रम लगातार होते रहने चाहिए, ताकि समाज अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा रह सके। उन्होंने कविता को नई पीढ़ी तक पहुँचाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

‘नन्हे’ आज भी दिलों में बसे हैं

प्रसिद्ध अभिनेता और लेखक औशिम खेत्रपाल ने कहा कि आज के दौर में कविता को इस तरह जीवंत बनाए रखना सराहनीय पहल है। उन्होंने अभिनव चतुर्वेदी को एक संवेदनशील और प्रभावशाली कलाकार बताते हुए कहा कि ‘हम लोग’ का ‘नन्हे’ आज भी दर्शकों की स्मृतियों में जीवित है। उन्होंने ऐसे और कार्यक्रमों की जरूरत पर बल दिया।

आगे भी जारी रहेगा कविता का सफर

कार्यक्रम की सूत्रधार नंदिनी चतुर्वेदी ने बताया कि ‘मौसम यही है’ को मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया ने उन्हें आगे और बेहतर कार्यक्रम करने की प्रेरणा दी है। उन्होंने कहा कि बदलते समय में पीछे छूटती जा रही कविता को फिर से उसका सम्मान दिलाना उनका उद्देश्य है और आने वाले समय में ऐसे और आयोजन किए जाएंगे।

वरिष्ठ पत्रकारों, कलाकारों और गणमान्य नागरिकों की मौजूदगी ने यह स्पष्ट कर दिया कि साहित्य और संस्कृति के प्रति समाज में आज भी गहरी रुचि और सम्मान बना हुआ है।

Leave A Reply

Your email address will not be published.

Agar Live