ग्रामीण अंचलों की सुविधा बनी दुविधा !
नगर में चल रहे ग्रामीण क्षेत्र के कियोस्क सेंटरों से ग्रामीण हो रहे परेशान
कानड़। सरकार ग्रामीण अंचलों तक बैंकिंग सुविधाएँ पहुँचाने के उद्देश्य से कियोस्क बैंकिंग सेंटर संचालित कर रही है, ताकि ग्रामीणों को अपने गांव में ही बैंकिंग सेवाएँ मिल सकें। लेकिन जमीनी हकीकत इसके विपरीत दिखाई दे रही है। ग्रामीण अंचलों के नाम पर जारी की गई कई कियोस्क आईडी अब नगर में संचालित हो रही हैं, जिससे ग्रामीणों को अपेक्षित सुविधा नहीं मिल पा रही है।
ग्रामीणों को मिलनी थी राहत, अब हो रही परेशानी
कानड़ की एकमात्र राष्ट्रीयकृत बैंक ऑफ इंडिया शाखा के बाहर संचालित कियोस्क सेंटर ग्रामीणों के लिए राहत का माध्यम बनने के बजाय परेशानी का कारण बन गए हैं। जिन संचालकों को ग्रामीण अंचलों में सेवा देने के लिए कियोस्क आईडी जारी की गई थी, वे अब नगर में दुकान खोलकर व्यवसाय कर रहे हैं।
ग्रामीण अनार सिंह, पेपा बाई, धुली बाई, सुगना बाई और भगवान सिंह ने बताया कि उन्हें छोटी राशि — पाँच सौ या एक हजार रुपये निकालने के लिए भी कानड़ आना पड़ता है। पहले गांव में ही एक संचालक अंगूठा लगवाकर राशि दे देता था, लेकिन अब वह सेवा बंद हो चुकी है।
ग्रामीणों की जेब पर पड़ रहा असर
ग्रामीणों का कहना है कि यदि गांव में ही कियोस्क सुविधा चालू रहे तो किराया और समय दोनों की बचत होती। कई बुजुर्गों ने बताया कि सरकारी पेंशन राशि निकालने के लिए भी अब उन्हें नगर तक आना पड़ता है।
जांच और कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जिन कियोस्क संचालकों को ग्रामीण अंचलों के लिए आईडी दी गई है, लेकिन वे नगर में बैंक के बाहर या आसपास बैठकर संचालन कर रहे हैं, उनके विरुद्ध कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही, बैंक द्वारा आईडी जारी करने के बाद स्थान का निरीक्षण क्यों नहीं किया जाता, यह भी सवालों के घेरे में है।
पूर्व में हो चुकी है गड़बड़ी
जानकारी के अनुसार, पूर्व में बैंक ऑफ इंडिया से जुड़े एक कियोस्क केंद्र पर ग्राहकों के अंगूठे का निशान लेकर धोखाधड़ी से पैसे निकाले जाने की शिकायतें भी सामने आ चुकी हैं। कुछ मामले थाने तक पहुंचे, लेकिन फिर भी संचालकों को एक से अधिक आईडी देकर पास ही संचालन की अनुमति दी जा रही है।
नेटवर्क समस्या या बहाना?
कई संचालक ग्रामीण अंचलों में नेटवर्क समस्या का हवाला देकर नगर में सेंटर चलाने का तर्क देते हैं। जबकि जिन गांवों में पंचायत व अन्य डिजिटल कार्य सुचारू रूप से हो रहे हैं, वहाँ नेटवर्क समस्या का बहाना तर्कसंगत नहीं लगता। बैंक से जारी आईडी उसी स्थान की लोकेशन पर सक्रिय की जाती है, इसके बावजूद संचालक बाद में नगर में स्थानांतरित होकर कार्य कर रहे हैं।
अब देखना होगा बैंक क्या कदम उठाती है
ग्रामीणों ने प्रशासन और बैंक अधिकारियों से मांग की है कि ग्रामीण अंचलों के नाम पर नगर में संचालित हो रहे कियोस्क सेंटरों की जांच की जाए और नियम विरुद्ध पाए जाने वाले संचालकों की आईडी तत्काल निरस्त की जाए।
इनका कहना –
हम ने ग्रामीण अंचल की जो आईडी कानड़ में आसपास चला रहे उनको पहले भी नोटिक दिए थे एक बार फिर देगे, नहीं सुधार होने पर कार्यवाही की जाएगी।
मोहम्मद इमरान शाखा प्रबंधक बैंक ऑफ इंडिया कानड़
