किसान संघ के आंदोलन के दबाव में सरकार ने मानी सभी मांगें |
लैंड पुलिंग एक्ट समाप्त, गजट नोटिफिकेशन रद्द; किसान शक्ति की एकजुटता का प्रभाव
उज्जैन |
मध्यप्रदेश में लैंड पुलिंग कानून के विरोध में 18 नवंबर को प्रस्तावित “डेरा डालो—घेरा डालो” आंदोलन से पहले ही मध्यप्रदेश सरकार ने भारतीय किसान संघ की सभी प्रमुख मांगें स्वीकार कर ली हैं। सोमवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दिल्ली स्थित किसान शक्ति कार्यालय पहुंचकर संघ के केंद्रीय पदाधिकारियों से विस्तृत चर्चा की, जिसके बाद सरकार ने लैंड पुलिंग एक्ट समाप्त करने और सिंहस्थ क्षेत्र से संबंधित गजट नोटिफिकेशन रद्द करने पर सहमति दे दी।
किसान संघ ने सिंहस्थ क्षेत्र में स्थाई निर्माण रोकने और उज्जैन के किसानों पर दर्ज सभी मुकदमों को वापस लेने की मांगों को भी प्रमुखता से रखा, जिन्हें सरकार ने स्वीकार कर लिया है।
केंद्र से मिले निर्देश के बाद किसान संघ का प्रदेश प्रतिनिधि मंडल उज्जैन से भोपाल पहुंचा और मुख्यमंत्री को लिखित मांग पत्र सौंपा। इस प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश अध्यक्ष कमल सिंह आंजना, क्षेत्र संगठन मंत्री महेश चौधरी, मालवा प्रांत महामंत्री रमेश दांगी, प्रांत मंत्री भारत सिंह बैस और संगठन मंत्री अतुल माहेश्वरी शामिल थे। सरकार द्वारा मांगें मान लिए जाने पर प्रतिनिधि मंडल ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।
किसान संघ के आंदोलन को लेकर प्राप्त इंटेलिजेंस रिपोर्ट में बताया गया था कि 18 जिलों से बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टरों, राशन-पानी और अन्य संसाधनों के साथ उज्जैन पहुंचने की तैयारी कर रहे हैं। रिपोर्ट में शहर में संभावित अव्यवस्था की आशंका जताई गई थी। सोशल मीडिया पर आंदोलन के समर्थन में बढ़ते माहौल को देखते हुए सरकार ने हालात बिगड़ने से पहले ही सभी मांगें स्वीकार कर लीं।
किसान संघ की प्रमुख मांगे
सिंहस्थ क्षेत्र में लैंड पुलिंग एक्ट पूर्णतः समाप्त किया जाए।
उज्जैन नगर विकास योजना (TDS-8, 9, 10, 11) से संबंधित लैंड पुलिंग एक्ट का गजट नोटिफिकेशन रद्द किया जाए।
किसानों पर दर्ज सभी प्रकरण वापस लिए जाएँ।
सिंहस्थ क्षेत्र में कोई स्थायी निर्माण न किया जाए।
किसान संघ ने सरकार के निर्णय को “संगठित किसान शक्ति की जीत” बताया है।
