जिला अस्पताल में लापरवाही के आरोप, बच्ची की मौत के बाद भी कार्रवाई नहीं

 

सीएम हेल्पलाइन व जनसुनवाई में शिकायत, परिजन न्याय के लिए भटकने को मजबूर

 

आगर मालवा। जिला अस्पताल में इलाज में लापरवाही और मरीजों को निजी क्लिनिक की ओर भेजने के आरोप एक बार फिर सामने आए हैं। ग्राम भदवासा लाला, तहसील बड़ौद निवासी बालूराम मालवीय ने अपनी पुत्री की मौत के लिए अस्पताल के चिकित्सकों को जिम्मेदार ठहराते हुए कलेक्टर को जनसुनवाई में आवेदन देकर न्याय की मांग की है। पीड़ित ने इस संबंध में सीएम हेल्पलाइन पर भी शिकायत दर्ज कराई है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से परिजन परेशान हैं।

 

आवेदन के अनुसार, जुलाई 2025 में बालूराम की पुत्री को पेट दर्द की शिकायत पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां डॉ. कमल सागरिया द्वारा उसका उपचार किया गया। लगभग 20 दिनों तक भर्ती रहने के दौरान सभी जांच रिपोर्ट सामान्य बताई गईं और उसे खून भी चढ़ाया गया, लेकिन उसकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ।

 

पीड़ित का आरोप है कि उपचार के दौरान डॉक्टर द्वारा निजी क्लिनिक पर इलाज कराने की सलाह दी गई। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण परिजन वहां इलाज नहीं करा सके, जिसके बाद बच्ची की हालत लगातार बिगड़ती चली गई। परिजनों का यह भी आरोप है कि बीमारी के संबंध में उन्हें स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।

 

स्थिति गंभीर होने पर परिजन बच्ची को अहमदाबाद (गुजरात) ले गए, जहां चिकित्सकों ने दोनों किडनी खराब होने और पहले से संक्रमण होने की जानकारी दी। वहां के डॉक्टरों के अनुसार समय पर उचित उपचार नहीं मिलने से स्थिति गंभीर हो गई। बच्ची को 25 दिसंबर 2025 को भर्ती किया गया था, जहां 7 फरवरी 2026 को उसकी मृत्यु हो गई।

 

पीड़ित ने बताया कि वह 24 फरवरी 2026 एवं 10 मार्च 2026 को भी कलेक्टर को आवेदन दे चुका है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इससे परिजन न्याय के लिए भटकने को मजबूर हैं।

 

जांच रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपी

मामले में कलेक्टर द्वारा जांच टीम गठित की गई थी, जिसमें एसडीएम मिलिंद ढोके भी शामिल थे। एसडीएम के अनुसार जांच पूरी कर रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी गई है, अब आगे की कार्रवाई प्रशासन स्तर पर की जाएगी।

 

डॉक्टर का पक्ष भी आया सामने

वहीं, डॉ. के.के. सागरिया ने आरोपों को लेकर कहा कि बच्ची का इलाज लगभग आठ माह पहले किया गया था। उन्होंने बताया कि सभी डॉक्टर अपने निवास पर भी प्रैक्टिस करते हैं, जिसे शासन की अनुमति प्राप्त है। उन्होंने दावा किया कि बच्ची का उपचार जिला अस्पताल में भर्ती कर किया गया और शिकायतकर्ता द्वारा विभिन्न स्थानों पर शिकायतें की गई हैं।

 

परिजनों का कहना है कि यदि समय रहते सही उपचार और स्पष्ट जानकारी मिलती, तो बच्ची की जान बचाई जा सकती थी। अब इस पूरे मामले में प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार है।

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