सेवा ही परमो धर्म: कड़कड़ाती ठंड में युवाओं की नि:स्वार्थ गोसेवा |
प्रतिदिन लोडिंग वाहन में रात के समय निकलते है युवा, गायों को चारा खिलाने के लिए प्रत्येक युवा देता है 50 रुपये
सुसनेर। शहर की युवा पीढ़ी ने यह साबित कर दिया है कि यदि लक्ष्य पवित्र हो, तो कोई भी कार्य मुश्किल नहीं है। जहाँ एक ओर लोग कड़कड़ाती ठंड में अपने घरों में दुबक जाते हैं, वहीं नवयुवक गोसेवा समिति के ये 60 युवा रात के अंधेरे में सड़कों पर उतरकर सेवा का धर्म निभा रहे हैं। युवाओं का कहना है कि कोई सेवा छोटी या बड़ी नही होती। निःस्वार्थ भाव से की गई सेवा ही श्रेष्ठ सेवा कहलाती है।
आत्मनिर्भर सेवा मॉडल
इन युवाओं ने किसी सरकारी मदद या बड़े दान का इंतजार करने के बजाय स्वयं सहायता का रास्ता चुना है। समिति का हर सदस्य अपनी जेब से 50 रुपये प्रतिदिन दान करता है। इस एकत्रित राशि से लोडिंग वाहन के माध्यम से गोवंश के लिए चारा, खल और गुड़ की व्यवस्था की जाती है।
रात के पहरेदार –जब तापमान न्यूनतम स्तर पर होता है, तब ये युवा अपने चार पहिया वाहन के साथ शहर के उन कोनों में पहुँचते हैं जहाँ निराश्रित गोवंश के समूह ठिठुर रहे होते हैं। गुड़ और चारा न केवल उनकी भूख मिटाता है, बल्कि ठंड से लड़ने के लिए उन्हें ऊर्जा भी प्रदान करता है।
युवाओं का संदेश
समिति के सदस्यों का कहना है:
”कोई भी सेवा छोटी या बड़ी नहीं होती। सच्ची सेवा वही है जो मुस्कुराहट के साथ और नि:स्वार्थ भाव से की जाए। हमें यह अवसर मिला है, और हम इसे अपना सौभाग्य मानते हैं।”
समाज से अपील
यह कार्य न केवल सराहनीय है बल्कि अनुकरणीय भी है। समाज के हर वर्ग को आगे आकर इन युवाओं का उत्साहवर्धन करना चाहिए। यदि आप समय नहीं दे सकते, तो संसाधनों या वित्तीय रूप से इस मुहिम का हिस्सा बन सकते हैं।
