आगर-मालवा। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर शुक्रवार को जिला जेल आगर-मालवा में भाई-बहन के प्रेम और भावनाओं का मार्मिक दृश्य देखने को मिला। जेल की सलाखें भले ही भाइयों को अपनी बहनों से दूर रखती हों, लेकिन रक्षाबंधन के दिन यह दूरी कुछ समय के लिए खत्म हो गई। जेल मुख्यालय मध्यप्रदेश, भोपाल के निर्देशानुसार बंदी भाइयों को उनकी बहनों से प्रत्यक्ष (खुली) मुलाकात कराकर रक्षाबंधन का पर्व मनाया गया।
जिला जेल में आयोजित इस विशेष मुलाकात के दौरान 97 बंदी भाइयों की उनकी बहनों से मुलाकात कराई गई। इस दौरान 258 बहनों और 53 बच्चों ने जेल पहुंचकर अपने परिजनों से मुलाकात की। बहनों ने अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी और उनके सुखी, स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन के साथ ही जल्द रिहाई की कामना की।
राखी बांधते समय कई बहनों और भाइयों की आंखें नम नजर आईं। लंबे समय बाद या विशेष पर्व पर अपनों से मिलने की खुशी और भावुकता का माहौल जेल परिसर में दिखाई दिया। बच्चों ने भी अपने बंदी परिजनों से मुलाकात की। इस दौरान भाई-बहन के रिश्ते की आत्मीयता और पारिवारिक जुड़ाव साफ नजर आया।
सुरक्षा के बीच हुई खुली मुलाकात
उप जेल अधीक्षक हीरालाल परमार ने बताया कि रक्षाबंधन के अवसर पर जेल मुख्यालय के निर्देशानुसार बंदियों की बहनों के लिए प्रत्यक्ष खुली मुलाकात की व्यवस्था की गई थी। मुलाकात के दौरान जेल प्रशासन द्वारा आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की गई। पूरे आयोजन के दौरान जेल परिसर में सुरक्षा एवं खैरियत की स्थिति सामान्य रही।
बंदियों में पारिवारिक जुड़ाव मजबूत करने की पहल
जेल प्रशासन के अनुसार इस तरह के आयोजन का उद्देश्य बंदियों को उनके परिवार और सामाजिक मूल्यों से जोड़े रखना है। रक्षाबंधन जैसे पारिवारिक पर्व पर बहनों से मुलाकात और राखी बंधवाने से बंदियों में पारिवारिक रिश्तों के प्रति भावनात्मक जुड़ाव मजबूत होता है। साथ ही ऐसे आयोजन जेल में सुधारात्मक वातावरण तैयार करने और बंदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
रक्षाबंधन के अवसर पर जिला जेल में हुआ यह आयोजन इस बात का संदेश भी दे गया कि जेल की दीवारें और सलाखें भले ही किसी व्यक्ति को अपनों से दूर कर दें, लेकिन भाई-बहन के प्रेम और रिश्तों की भावनाओं को कैद नहीं कर सकतीं।
