- नलखेड़ा से निकलीं सात अर्थियां पहुंचीं ओडिशा, पुरी के स्वर्गद्वार में गमगीन माहौल में हुआ अंतिम संस्कार
नलखेड़ा, आगर-मालवा। मध्यप्रदेश के नलखेड़ा में मां बगलामुखी मंदिर के समीप हुए दर्दनाक हादसे में जान गंवाने वाले ओडिशा के सात श्रद्धालुओं के पार्थिव शरीर सोमवार तड़के उनके गृह राज्य पहुंचे। इसके बाद पार्थिव शरीरों को पुरी के स्वर्गद्वार ले जाया गया, जहां परिजनों और रिश्तेदारों की मौजूदगी में सातों का अंतिम संस्कार किया गया। एक साथ सात चिताएं जलने से स्वर्गद्वार का माहौल गमगीन हो गया।
नलखेड़ा में बरसाती नाले के तेज बहाव में कार बह जाने से कुल आठ लोगों की मौत हुई थी। इनमें ओडिशा के सात श्रद्धालु शामिल थे, जबकि आठवां मृतक वाहन चालक था, जो आगर-मालवा जिले की बड़ौद तहसील के ग्राम सूदवास का निवासी था। हादसे के बाद पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी कर ओडिशा के सातों मृतकों के पार्थिव शरीर विशेष रेफ्रिजरेटेड एंबुलेंस से पुलिस एस्कॉर्ट के साथ ओडिशा रवाना किए गए थे।
रातभर शवों का इंतजार, सुबह पहुंचीं सात अर्थियां
हादसे की खबर मिलने के बाद भुवनेश्वर में मृतकों के घरों पर रविवार रात से ही परिजन, रिश्तेदार और परिचित जुटने लगे थे। सभी को सातों पार्थिव शरीरों के पहुंचने का इंतजार था। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की निगरानी में दो एंबुलेंस पुलिस एस्कॉर्ट के साथ पार्थिव शरीर लेकर भुवनेश्वर पहुंचीं। इसके बाद उन्हें अंतिम संस्कार के लिए पुरी ले जाया गया।
सोमवार तड़के पुरी के स्वर्गद्वार में सातों मृतकों का अंतिम संस्कार किया गया। परिजनों ने नम आंखों से अपने प्रियजनों को अंतिम विदाई दी। एक ही परिवार के सात सदस्यों की एक साथ अंतिम विदाई ने वहां मौजूद लोगों को भी भावुक कर दिया।
एक परिवार के सात सदस्यों की मौत
इस हादसे में ओडिशा के एक ही परिवार के सात सदस्य काल के गाल में समा गए। मृतकों में शिव प्रसाद बेहरा, उनके बेटे कृष्ण राज, बेटी सायरा, रीतारानी, उनके पति ज्ञानेंद्र कुमार, उनके बेटे साई स्वास्तिक और राधारानी शामिल थे।
बताया गया कि परिवार धार्मिक यात्रा के लिए मध्यप्रदेश आया था। परिवार के सदस्य गुरुवार को भुवनेश्वर से ट्रेन के जरिए रवाना हुए थे और शुक्रवार सुबह उज्जैन पहुंचे थे। इसके बाद उन्होंने नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी मंदिर जाने के लिए टैक्सी ली थी। मंदिर में दर्शन के बाद लौटते समय बरसाती नाले में अचानक बढ़े तेज बहाव की चपेट में कार आ गई और देखते ही देखते बह गई।
अपनों ने दी मुखाग्नि, एक साथ पंचतत्व में विलीन हुए सातों
पुरी के स्वर्गद्वार में अंतिम संस्कार के दौरान परिवार के सदस्यों ने अपने प्रियजनों को मुखाग्नि दी। रीतारानी, उनके पति ज्ञानेंद्र, उनके पुत्र और राधारानी को उनके भाई दिलीप बेहरा ने मुखाग्नि दी। वहीं शिव प्रसाद बेहरा और उनके दोनों बच्चों का अंतिम संस्कार निरंजन बेहरा ने किया।
सातों पार्थिव शरीरों के अंतिम संस्कार के दौरान परिवार के साथ बड़ी संख्या में रिश्तेदार और परिचित मौजूद रहे। एक साथ जली सात चिताओं ने हादसे की भयावहता और परिवार पर टूटे दुख को सामने ला दिया।
हादसे के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
मृतक शिव प्रसाद के भाई सर्वेश्वर बेहरा ने नलखेड़ा में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि दुर्घटना स्थल पर पर्याप्त चेतावनी संकेत और बैरिकेडिंग नहीं थी। हालांकि, यह परिवार की ओर से लगाया गया आरोप है। हादसे के वास्तविक कारणों और घटनास्थल पर सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े तथ्यों की आधिकारिक जांच अलग विषय है।
धार्मिक यात्रा बनी जिंदगी की आखिरी यात्रा
जिस परिवार ने धार्मिक यात्रा के लिए मध्यप्रदेश का रुख किया था, उसी यात्रा का अंत सात अर्थियों के साथ हुआ। मां बगलामुखी मंदिर में दर्शन के बाद लौटते समय बरसाती नाले के तेज बहाव ने परिवार के सात सदस्यों की जिंदगी छीन ली।
नलखेड़ा से रवाना हुए सात पार्थिव शरीर अब ओडिशा पहुंचकर पंचतत्व में विलीन हो चुके हैं। हादसे के बाद जहां मध्यप्रदेश में बरसाती नाले और घटनास्थल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं, वहीं ओडिशा में एक परिवार के सात सदस्यों की मौत से परिजनों और परिचितों के बीच शोक का माहौल है।
