60 किमी के मार्ग पर कई जगह सुरक्षा इंतजाम नाकाफी, गजरिया-घोसली से लेकर कानड़ के राजवाड़ा तक बारिश में पुलियाओं पर भर जाता है पानी
ब्यूरो – दारा सिंह आर्य
आगर मालवा। नलखेड़ा में बारिश के दौरान पुलिया पर पानी के तेज बहाव में कार बहने से आठ लोगों की मौत की दर्दनाक घटना के बाद शाजापुर-नलखेड़ा मार्ग की पुल-पुलियाओं की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। करीब 60 किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर कई स्थानों पर छोटी पुल-पुलियाएं और रपटें हैं। जहां तेज बारिश के दौरान पानी ऊपर से बहने लगता है। इससे जहां आवागमन बाधित होता है। वहीं सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंता बनी रहती है।
गाजरिया-घोसली नदी की पुलिया पर ऊपर से बहता है पानी
शाजापुर से नलखेड़ा कानड़ होकर जाना होता हे। इस मार्ग पर ग्राम गाजरिया घोसली के यहां बनी पुलिया बारिश के दौरान परेशानी का कारण बनती है। ग्रामीणों के अनुसार तेज बारिश में नदी का पानी पुलिया के ऊपर से बहने लगता है। ऐसे समय यहां से आवागमन जोखिम भरा हो जाता है।
ग्राम घोसली निवासी ईश्वर सिंह राजपूत, सूरज सिंह, पवन और रामप्रसाद ने बताया कि मार्ग पर कई स्थानों पर पुलियाओं का निर्माण किया गया है। लेकिन गांव के पास नदी पर पुलिया का निर्माण व्यवस्थित तरीके से नहीं किया गया है। आज भी रपटा बना हे।बारिश के दौरान पानी का बहाव बढ़ने से काफी परेशानी आती है। ग्रामीणों के अनुसार कई बार लोग और वाहन पुलिया से नीचे की ओर लटकने जैसी स्थिति में पहुंच चुके हैं। ग्रामीणों ने पुलिया को व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने की मांग की है।
कानड़ के राजवाड़ा की पुलिया पर भी घंटों बाधित रहता है आवागमन
इसी मार्ग पर कानड़ के राजवाड़ा क्षेत्र में बनी पुलिया पर भी बारिश के दौरान पानी भर जाता है। तेज बारिश के समय पुलिया पर पानी जमा रहने से कई घंटों तक आवागमन बाधित रहने की स्थिति बनती है। ऐसे में यहां भी सुरक्षा के स्थायी इंतजाम किए जाने की जरूरत है, ताकि बारिश के दौरान वाहन चालकों और राहगीरों को परेशानी न हो।
बारिश में बैरिकेड लगाकर कर्मचारियों की ड्यूटी
नप सीएमओ कानड़ शिव सिंह चौहान ने बताया कि बारिश के दौरान सुरक्षा को लेकर कई बार बैरिकेड लगाए जाते हैं। साथ ही वहां कर्मचारियों की ड्यूटी भी लगाई जाती है।ताकि बारिश के दौरान लोगों को पुलिया से निकलने से रोका जा सके और किसी तरह की दुर्घटना न हो।
कई जगह सुरक्षा रेलिंग और चेतावनी संकेत की जरूरत
शाजापुर से नलखेड़ा तक मार्ग पर कई छोटी पुल-पुलियाओं पर सुरक्षा रेलिंग, चेतावनी बोर्ड, रिफ्लेक्टर और बैरिकेडिंग जैसे इंतजाम पर्याप्त नहीं होने हादसो का डर बना रहता हे।बारिश और रात के समय पानी सड़क या पुलिया के ऊपर आने पर वाहन चालकों को पानी की गहराई और बहाव का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है।
नलखेड़ा की घटना के बाद सुरक्षा ऑडिट की जरूरत
नलखेड़ा में हुई दर्दनाक घटना के बाद अब शाजापुर-नलखेड़ा मार्ग की सभी पुल-पुलियाओं और रपटों का निरीक्षण किए जाने की जरूरत है। विशेषकर गजरिया-घोसली नदी की पुलिया और कानड़ राजवाड़ा की पुलिया ओर पिलवास के पास बनी पुलिया जैसे संवेदनशील स्थानों को चिन्हित कर वहां स्थायी सुरक्षा इंतजाम किए जाने चाहिए।
ग्रामीणों का कहना है कि हादसा होने का इंतजार करने के बजाय बारिश के दौरान संवेदनशील पुल-पुलियाओं पर पहले से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए, ताकि आवागमन भी सुचारु रहे और किसी संभावित बड़े हादसे को टाला जा सके।
