जीएसटी 2.0 संक्रमण काल – छोटे दवा विक्रेताओं की राहत को लेकर एआईओसीडी का ने कि सरकार से माँग |
आगर मालवा। देशभर के 12.5 लाख से अधिक दवा विक्रेताओं और वितरकों का प्रतिनिधित्व करने वाला संगठन ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ़ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) ने जीएसटी 2.0 के संक्रमण काल में छोटे खुदरा दवा विक्रेताओं और कम्पोजिट डीलरों को राहत प्रदान करने की मांग की है। संगठन ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को ज्ञापन भेजकर तत्काल कदम उठाने का अनुरोध किया है। एआईओसीडी के अध्यक्ष जे.एस. शिंदे और सचिव राजीव सिंघल ने बताया कि जीएसटी दरों में हालिया कटौती (18 से 5, 12से 0 और 12 से 5) से उपभोक्ताओं को तो लाभ हुआ है। लेकिन छोटे व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
ज्ञापन के मुख्य बिंदु मे ये हे शामिल-
अनरजिस्टर्ड और कम्पोजिट डीलरों ने पहले उच्च जीएसटी दरों पर स्टॉक खरीदा था, जिसे अब कम कीमत पर बेचना पड़ रहा है। दवाओं पर मार्जिन NPPA द्वारा तय होने से उनके लिए घाटा अपरिहार्य है।
अधिकांश छोटे व्यापारी जीएसटी में पंजीकृत नहीं हैं या कम्पोजिट डीलर हैं, जो इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लाभ नहीं ले सकते।
एआईओसीडी ने मांग की है कि तीन माह तक पुराने एमआरपी पर स्टॉक बेचने की अनुमति दी जाए। यदि आवश्यक हो तो विशेष राहत पैकेज घोषित किया जाए और इस दौरान छोटे विक्रेताओं पर किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई न हो।
यदि राहत नहीं दी गई तो हजारों छोटे केमिस्ट दुकानदारों को ताले लगाने पड़ सकते हैं। इसका सीधा असर ग्रामीण और दूरदराज़ क्षेत्रों में दवाओं की उपलब्धता पर पड़ेगा।
वही संघठन के आगर ज़िला अध्यक्ष अनिल शर्मा, सचिव योगेश पाण्डे, राजेश मेठी ने भी सरकार से अपील की है कि इस ऐतिहासिक सुधार के दौर में खुदरा दवा व्यापार की रीढ़ को सुरक्षित रखते हुए छोटे विक्रेताओं को संरक्षण प्रदान किया जाए।
