नगर परिषद की उदासीनता पर नागरिकों में आक्रोश, टूटी सड़कें–जाम नालियां और चरमराई सफाई व्यवस्था
कानड़। नगर परिषद क्षेत्र के कई वार्डों में इन दिनों नालियों, सड़कों और सफाई व्यवस्था की स्थिति अत्यंत दयनीय हो चुकी है। नगर परिषद की लापरवाही से परेशान नागरिक अब स्वयं समस्याओं से जूझ रहे हैं। स्थिति यह है कि कुछ पार्षदों ने हालात से निराश होकर अपने निजी खर्च से निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिए हैं।
वार्ड क्रमांक 7 के पार्षद एवं पूर्व नगर पालिका उपाध्यक्ष दरबार सिंह आर्य ने बताया कि वार्ड में सड़कों व नालियों की जर्जर स्थिति को लेकर उन्होंने कई बार नगर परिषद अधिकारियों और अध्यक्ष प्रतिनिधि को अवगत कराया, किंतु तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी किसी ने ध्यान नहीं दिया।
उन्होंने कहा — “जनता की तकलीफ देखकर अब मैंने अपने निजी खर्च से ही जगह-जगह नालियों की मरम्मत और सड़क निर्माण कार्य शुरू करवाया है। यदि हम केवल इंतजार करते रहते, तो नागरिकों की परेशानी और बढ़ जाती।”
इसी तरह वार्ड क्रमांक 9 की स्थिति भी इससे भिन्न नहीं है। यहां की गलियां, नालियां और सड़कें पूरी तरह उखड़ चुकी हैं। स्थानीय नागरिकों के अनुसार, पिछले परिषद काल में बनी सड़कों के बाद अब तक कोई नया कार्य नहीं हुआ। कई क्षेत्रों में गंदा पानी सड़कों पर बहता रहता है, जिससे लोगों का आवागमन कठिन हो गया है।
नागरिकों ने नगर परिषद प्रशासन पर सीधे आरोप लगाते हुए कहा कि पूर्व परिषद द्वारा आरंभ किए गए निर्माण कार्य अधूरे ही छोड़ दिए गए, जबकि संबंधित राशि अब तक जारी नहीं की गई है। वर्तमान परिषद का कार्यकाल समाप्ति की ओर है, परंतु न पानी की व्यवस्था सुधरी, न सड़कें बनीं और न ही सफाई व्यवस्था पटरी पर लौटी।
नगर के अन्य वार्डों की दशा भी इससे अलग नहीं है। जगह-जगह कचरे के ढेर, जाम नालियां और उखड़ी सड़कें नागरिकों की परेशानियां बढ़ा रही हैं। सफाई अभियान की हकीकत भी उजागर हो रही है, क्योंकि वार्डों में नियमित सफाई नहीं हो रही और कर्मचारी समय पर नहीं पहुंच रहे।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि नगर परिषद की निष्क्रियता के कारण शहर का विकास पूरी तरह ठप हो गया है। नागरिकों को मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है — न पानी की समुचित आपूर्ति है, न सड़कें सुरक्षित हैं, और न ही सफाई व्यवस्था दुरुस्त।
नागरिकों का सवाल है — “जब पार्षदों को अपने निजी खर्च से निर्माण कार्य करवाने की नौबत आ रही है, तो नगर परिषद का अस्तित्व आखिर किस उद्देश्य से है?”
