कहानी बदलाव की
आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण में सहभागिता कर रहीं हैं समूह की महिलाएं
मिट्टी और गोबर से बना रहीं गणेशजी की प्रतिमाएं,
आगर-मालवा, 14 सितम्बर2026, आजीविका मिशन से जुड़कर आगर मालवा जिले की ग्रामीण महिलाएं स्व सहायता समूह के माध्यम से आर्थिक गतिविधियां संचालित कर महिला सशक्तिकरण के साथ ही जीवन में बदलाव की कहानियां भी गढ़ रही हैं। महिला स्व सहायता समूह की यह महिलाएं गणेश उत्सव की तैयारियों के बीच इस बार गोबर एवं मिट्टी के गणेश जी की प्रतिमाएं तैयार कर आम जनों को विक्रय के लिए उपलब्ध करवा रही हैं। स्व सहायता समूह की महिलाओं ने सफल उद्यमी के रूप में शहर के मुख्य बाजार, पुरानी नगर पालिका के सामने विक्रय स्टाल लगाया है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) से जुड़ी समूह महिलाओं द्वारा तैयार की गई मिट्टी एवं गोबर की गणेश जी की प्रतिमाएं पर्यावरण अनुकूल है।
‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को साकार करते हुए आजीविका मिशन द्वारा समूह महिलाओं को मूर्ति निर्माण का प्रशिक्षण देकर उनके उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने में सहयोग किया है।
कलेक्टर डॉ. शेर सिंह मीना और जिला पंचायत सीईओ श्री बीएस सोलंकी के निर्देशन में नगर पालिका के सहयोग से मुख्य बाजार में इन प्रतिमाओं के विक्रय के लिए स्टॉल हेतु स्थान उपलब्ध कराया गया है। स्टॉल पर आवर ग्राम की महिलाओं द्वारा निर्मित मिट्टी की गणेश प्रतिमाएं तथा लाडवन ग्राम की महिलाओं द्वारा तैयार गोबर की गणेश प्रतिमाएं विक्रय के लिए उपलब्ध हैं। कलेक्टर डॉक्टर शेर सिंह मीना ने स्वयं स्व सहायता समूह की महिलाओं द्वारा अगर में स्थापित विक्रय स्टॉल पहुंचकर गणेश चतुर्थी के अवसर पर इको फ्रेंडली मिट्टी के गणेश जी की प्रतिमा क्रय की। उन्होंने जिले वासियों से भी गणेश चतुर्थी पर इको फ्रेंडली मिट्टी के गणेश जी की प्रतिमाएं स्थापित करने की अपील की है।
गत वर्ष भी गोबर से निर्मित गणेश प्रतिमाओं को नागरिकों का अच्छा प्रतिसाद मिला था। इससे उत्साहित महिलाएं इस वर्ष भी नए उत्साह और आत्मविश्वास के साथ अपने उत्पाद लेकर बाजार में पहुंची हैं। स्टॉल पर गणेश प्रतिमाओं के विक्रय का कार्य भग्गू बाई, राधाबाई एवं रंभा बाई द्वारा किया जा रहा है। इन महिलाओं को आरसेटी एवं माटी कला बोर्ड के माध्यम से मूर्ति निर्माण का प्रशिक्षण दिया गया है। प्रशिक्षण के बाद महिलाओं ने अपने हुनर को केवल कला तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे आजीविका और आत्मनिर्भरता का माध्यम बनाया है।
