आम्बादेव में किसान के खेत को बनाया निशाना, एसपी कार्यालय और जनसुनवाई में शिकायत,
वन विभाग की रात की गश्त पर सवाल
आगर मालवा। बड़ोद तहसील क्षेत्र के ग्राम आम्बादेव में रात के अंधेरे में अज्ञात लोग किसान के खेत से करीब 25 से 30 बड़े खैर के पेड़ काटकर ले गए। घटना के बाद किसान रघुनाथ सिंह आर्य ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय और जनसुनवाई में आवेदन देकर शिकायत की है। वन विभाग के अधिकारियों को भी मामले की जानकारी दी गई है। एक साथ इतनी बड़ी संख्या में खैर के पेड़ काटे जाने से वन संपदा की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।
खैर की लकड़ी इसलिए भी महत्वपूर्ण
खैर का पेड़ अपनी मजबूत और टिकाऊ लकड़ी के लिए जाना जाता है। इसकी लकड़ी का उपयोग पारंपरिक रूप से कृषि उपकरण, खंभे, ईंधन सहित विभिन्न कार्यों में किया जाता है। खैर की लकड़ी से कत्था भी तैयार किया जाता है। जिसके कारण व्यावसायिक दृष्टि से भी इस पेड़ का महत्व है। पेड़ की छाल और लकड़ी का पारंपरिक उपयोग भी लंबे समय से होता आया है। यही वजह है कि खैर के परिपक्व पेड़ों की कटाई वन संपदा के नुकसान के साथ आर्थिक महत्व का विषय भी बन जाती है।
पेड़ काटते रहे, किसी को भनक तक नहीं लगी
किसान रघुनाथ सिंह आर्य के अनुसार ग्राम आम्बादेव से रलायती गांव जाने वाले मार्ग पर उनकी कृषि भूमि है। यहां बड़ी संख्या में खैर के पेड़ खड़े थे। आरोप है कि अज्ञात लोग रात में खेत पर पहुंचे और करीब 25 से 30 पेड़ों को काटकर ले गए। इतनी बड़ी संख्या में पेड़ काटने और लकड़ी को मौके से ले जाने के बावजूद घटना की जानकारी तत्काल सामने नहीं आने से क्षेत्र की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
जंगल के आसपास रात की गश्त कितनी प्रभावी?
क्षेत्र में वन विभाग की जमीन और जंगल भी मौजूद हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि रात के समय वन क्षेत्र और उसके आसपास गश्त कितनी प्रभावी है। यदि इतने पेड़ काटने में काफी समय लगा होगा और लकड़ी को वाहन से ले जाया गया होगा तो क्या इस दौरान वन अमले की नजर नहीं पड़ी? किसान ने मामले की पूरी जांच कराने की मांग की है।
रास्तों के सीसीटीवी फुटेज खंगालने की मांग
किसान ने शिकायत में पेड़ काटने वालों का पता लगाने के साथ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस मार्ग से लकड़ी ले जाई गई होगी, वहां आसपास या रोड पर लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले जाएं तो आरोपितों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है। लकड़ी को ले जाने के लिए इस्तेमाल किए गए वाहन की भी जांच किए जाने की बात कही।
रोज कट रहे पेड़, निगरानी व्यवस्था पर सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि जिले में जंगल और निजी जमीनों पर पेड़ों की कटाई को लेकर समय-समय पर शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में केवल घटना के बाद कार्रवाई के बजाय जंगल और संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित गश्त और लकड़ी के अवैध परिवहन पर निगरानी जरूरी है। आरा मशीनों तक पहुंचने वाली लकड़ी के स्रोत की जांच भी इस दिशा में महत्वपूर्ण हो सकती है।
शिकायत के बाद जांच का इंतजार
रघुनाथ सिंह आर्य ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय और जनसुनवाई में आवेदन देकर मामले की जांच, पेड़ काटने वालों की पहचान और नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है। अब पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि पेड़ कब और किसने काटे तथा लकड़ी कहां ले जाई गई। वन विभाग की ओर से मामले में की जाने वाली कार्रवाई पर भी नजर रहेगी।
इनका कहना
खेर की लकड़ी वाला जो मामला है वो रेवेन्यू ओर पुलिस का हे। उनके निजी जगह से चोरी हुई हे। हमें सूचना मिलने पर मौका देखा हे। सीसी कैमरे चेक करवाते हे। हमारे क्षेत्र में जो आरा मशीने हे, उनकी भी जांच करवाई जाएगी।
अशोक बघेल रेंजर आगर मालवा
